हमारा इतिहास
राष्ट्रीय विचारधारा को पुष्ट करने के कार्य में लगे बंधुओं द्वारा स्थापित
गोरखपुर में प्रथम शिशु मंदिर
सन 1952 में सर्वप्रथम गोरखपुर में ₹5 मासिक किराए के मकान में एक सरस्वती शिशु मंदिर प्रारंभ हुआ।
गीता विद्यालय परिसर का प्रारंभ
पू. श्री. माधव सदाशिवराव गोलवलकर "श्री गुरुजी" के कर कमलों द्वारा प्रारंभ हुआ।
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान
इस योजना को विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान का नाम दिया गया। प्रधान कार्यालय दिल्ली स्थित है।
विदर्भ में कार्य प्रारंभ
विद्या भारती विदर्भ ने 2002 से कार्य प्रारंभ किया।
हमारे 10 प्रमुख उद्देश्य
शिक्षा दर्शन का विकास
भारतीय संस्कृति एवं जीवनादर्शों के अनुरूप शिक्षा दर्शन विकसित करना।
राष्ट्रीय थाती का हस्तांतरण
भारत की आध्यात्मिक निधि एवं गौरवशाली परंपराओं की थाती वर्तमान पीढ़ी को सौंपना।
आधुनिक ज्ञान-विज्ञान
आधुनिकतम तकनीकी उपलब्धियों का उपयोग करते हुए शिक्षण प्रणाली विकसित करना।
सर्वांगीण विकास
शारीरिक, योग, संगीत, संस्कृत एवं नैतिक शिक्षा से चरित्र निर्माण।
शिक्षक प्रशिक्षण
कुशल, चरित्रवान एवं समर्पित शिक्षकों का निर्माण।
शोध एवं विकास
भारतीय मनोविज्ञान को शिक्षण प्रक्रिया का आधार बनाना।
ग्रामीण एवं जनजातीय कार्य
वंचित क्षेत्रों में कार्य विस्तार एवं दिशा-दर्शी प्रकल्प।
विद्वत् परिषद्
प्रदेश स्तर की शैक्षिक संगोष्ठियां एवं परिचर्चाएं।
राष्ट्रीय योजनाओं में सहयोग
भारत सरकार की शैक्षिक योजनाओं में सहयोग एवं परामर्श।
देश-विदेश संपर्क
शैक्षिक प्रयोगों के आदान-प्रदान के माध्यम के रूप में कार्य।
सरस्वती पंचपदीय शिक्षण विधि
पाँच पद — अधीति, बोध, अभ्यास, प्रयोग एवं प्रसार
अधीति
श्रवण एवं ग्रहण
बोध
समझ एवं चिंतन
अभ्यास
अभ्यास एवं सुदृढ़ता
प्रयोग
प्रयोग एवं अनुभव
प्रसार
ज्ञान का विस्तार
भारतीय शिक्षा दर्शन
भारतीय शिक्षा दर्शन का विकास
विद्या भारती एवं राष्ट्र भक्त शिक्षा शास्त्रियों का स्पष्ट मत है कि शिक्षा तभी व्यक्ति एवं राष्ट्र के जीवन के लिए उपयोगी होगी जब वह भारत के राष्ट्रीय जीवन दर्शन पर अधिष्ठित होगी जो मूलतः हिन्दू जीवन दर्शन है।
भारतीय मनोविज्ञान पर आधारित शिक्षण पद्धति
विद्या भारती ने भारतीय मनोविज्ञान का विकास किया है और उसी पर अपनी शिक्षण पद्धति को आधारित किया है तथा उसका नामकरण "सरस्वती पंचपदीय शिक्षण विधि" किया है।
हमारे कार्य के आयाम
संस्कृति बोध परियोजना
- अखिल भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा
- आचार्यों के लिए संस्कृति ज्ञान परीक्षा
- प्रश्न मंच कार्यक्रम
- निबंध प्रतियोगिता
शोध
- विद्यालय में आने वाली शैक्षिक समस्याओं का समाधान करने के लिए शैक्षिक शोध।
विद्वत परिषद
- शिक्षा एवं समाज के ज्वलंत विषयों पर चिंतन-मनन, गोष्ठियों एवं कार्यक्रमों का आयोजन।
पूर्व छात्र परिषद
- विद्या भारती संलग्न विद्यालयों के छात्रों का संगठन एवं खेलकूद स्पर्धाओं में सहभागिता।
गुणवत्ता परिषद
प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल परिषद
शिशुओं के आरोग्य एवं शिक्षा के बारे में चिंतन और योजना।
प्रारंभिक शिक्षा परिषद
प्रारंभिक शिक्षा के बारे में चिंतन और योजना।
मानक परिषद
SESQ — विद्यालय गुणवत्ता विकास हेतु मूल्यांकन व्यवस्था।
खेलकूद
School Games Federation of India के साथ संबद्धता। प्रांत, क्षेत्र एवं अखिल भारतीय स्तर पर प्रतियोगिताएं।
केंद्रीय एवं अन्य विषय
केंद्रीय विषय
- बालिका शिक्षा
- वैदिक गणित
- शिशु वाटिका